शनि देव को हिन्दू धर्म में न्याय का देवता माना जाता है। माना जाता है कि इनके प्रकोप से बड़े से बड़ा धनवान भी दरिद्र बन जाता है। शनिवार का दिन शनि देव को समर्पित होता है। इस दिन हनुमान जी को तेल चढ़ाने से शनि के साढ़ेसाती से मुक्ति मिलती है और शनि देव प्रसन्न होते हैं।
इस स्तोत्र का महत्व विशेष रूप से उन लोगों के लिए है, जो शनि की दशा या शनि की महादशा से प्रभावित हैं। यह स्तोत्र संकटों को दूर करने, मानसिक शांति पाने और जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए पढ़ा जाता है। यह विश्वास किया जाता है कि इस स्तोत्र के पाठ से शनि ग्रह की अशुभता समाप्त होती है और भक्तों को शनिदेव की कृपा प्राप्त होती है।
शनि दशनामानि स्तोत्र
कोणस्थः पिंगलो बभ्रुः कृष्णो रौद्रान्तको यमः ।
सौरिः शनैश्चरो मन्दः पिप्पलादेन संस्तुतः ।।
एतानि दशनामानि प्रातरूत्थाय यः पठेत् ।
शनैश्चर कृतः पीडा न कदाचित् भविष्यति ।।
शनि की प्रतिकूलता, साढ़ेसाती और ढैया से सभी भलीभांति परिचित है। शनि का जिक्र होते ही व्यक्ति के मन में भय व शंका का भाव आता है। जबकि सच यह है कि शनि ग्रह थोड़ी-सी स्तुति से तुरंत प्रसन्न हो जाते हैं।
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