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नर्मदा नदी केवल एक नदी नहीं बल्कि आस्था और विश्वास का प्रतीक है, इस अष्टकम में उल्लेख किया गया है कि हम केवल अमरता की ध्वनि सुन सकते हैं, जो नदी-काय के रूप में बह रही है, जो शंकर की जटाओं से निकलकर नद...

भगवान काल भैरव की अराधना करने के लिए इस काल भैरव अष्टकम (Kaal Bhairav Ashtakam) का जाप भक्तों के द्वारा किया जाता है| काल भैरव जी को भगवान शिव का अवतार ...

॥ दोहा ॥ह्रीं श्रीं क्लीं मेधा प्रभा,जीवन ज्योति प्रचण्ड।शान्ति कान्ति जागृत प्रगति,रचना शक्ति अखण्ड॥जगत जननी मङ्गल करनि,गायत्री सुखधाम।प्रणवों सावित्री स्वधा,स्वाहा पूरन काम॥॥ चौपाई ॥भूर्भुवः स्वः ॐ ...

॥ दोहा ॥जय गणेश गिरिजा सुवन,मंगल करण कृपाल।दीनन के दुःख दूर करि,कीजै नाथ निहाल॥जय जय श्री शनिदेव प्रभु,सुनहु विनय महाराज।करहु कृपा हे रवि तनय,राखहु जन की लाज॥॥ चौपाई ॥जयति जयति शनिदेव दयाल...

शनि देव को हिन्दू धर्म में न्याय का देवता माना जाता है। माना जाता है कि इनके प्रकोप से बड़े से बड़ा धनवान भी दरिद्र बन जाता है। शनिवार का दिन शनि देव को समर्पित होता है। इस दिन हनुमान जी को तेल चढ़ाने...

दुर्गा दुर्गार्तिशमनी दुर्गापद्विनिवारिणी।दुर्गमच्छेदिनी दुर्गसाधिनी दुर्गनाशिनी ॥दुर्गतोद्धारिणी दुर्गानिहन्त्री दुर्गमापहा।दुर्गमज्ञानदा दुर्गदैत्यलोकदवानला॥दुर्गमा दुर्गमालोका...

॥ सिद्धकुञ्जिकास्तोत्रम् ॥शिव उवाचशृणु देवि प्रवक्ष्यामि, कुञ्जिकास्तोत्रमुत्तमम्।येन मन्त्रप्रभावेण चण्डीजापः शुभो भवेत्॥1॥न कवचं नार्गलास्तोत्रं कीलकं न रहस्यकम्।न सूक्तं नापि ध्यानं च न न...

॥ अथ सप्तश्लोकी दुर्गा ॥॥ शिव उवाच ॥देवि त्वं भक्तसुलभेसर्वकार्यविधायिनी।कलौ हि कार्यसिद्ध्यर्थमुपायंब्रूहि यत्नतः॥॥ देव्युवाच ॥श्रृणु देव प्रवक्ष्यामिकलौ सर्वेष्टसाधनम्।मया तवैव स्नेहेनाप्यम्बास्तुति...

|| श्री गणपति अथर्वशीर्ष ||ॐ नमस्ते गणपतये।त्वमेव प्रत्यक्षं तत्वमसित्वमेव केवलं कर्ताऽसित्वमेव केवलं धर्ताऽसित्वमेव केवलं हर्ताऽसित्वमेव सर्वं खल्विदं ब्रह्मासित्व स...

शुक्लाम्बरधरं विष्णुं शशिवर्णं चतुर्भुजम् ।प्रसन्नवदनं ध्यायेत् सर्वविघ्नोपशान्तये ॥१॥यस्य द्विरदवक्त्राद्याः पारिषद्याः परः शतम् ।विघ्नं निघ्नन...

शुक्लाम्बरधरं विष्णुं शशिवर्णं चतुर्भुजम् ।प्रसन्नवदनं ध्यायेत् सर्वविघ्नोपशान्तये ॥१॥One should meditate on Vishnu, dressed in white robes,...

पशूनां पतिं पापनाशं परेशंगजेन्द्रस्य कृत्तिं वसानं वरेण्यम्जटाजूटमध्ये स्फुरद्गाङ्गवारिंमहादेवमेकं स्मरामि स्मरारिम् ॥१॥अर्थ — जो सम्पूर्ण प्राणियों के रक्षक हैं, पापका ध्वंस करने वाले हैं, परमेश्वर ह...

हिमाचल प्रदेश के प्रसिद्ध तीर्थों में से एक मणिकर्ण धार्मिक एकता का प्रतीक माना जाता है। यहां पर पार्वती नाम की एक नदी बहती है, जिसके एक ओर शि...

शारदीय नवरात्रि घट स्थापना ,कलश स्थापना मुहूर्त एवं विधिप्रतिवर्ष की भांति इसवर्ष भी हिंदुओ के प्रमुख त्योंहारों में से एक शारदीय नवरात्रि आश्विन शुक्ल पक्ष प्रतिपदा से नवमी तक म...

ॐ मृत्युंजय परेशान जगदाभयनाशन ।तव ध्यानेन देवेश मृत्युप्राप्नोति जीवती ।।वन्दे ईशान देवाय नमस्तस्मै पिनाकिने ।नमस्तस्मै भगवते कैलासाचल वासिने ।आदिमध्यांत रूपाय मृत्युनाशं करोतु मे ।।त्र्यंबकाय नमस्तुभ...

अर्धनारीश्वर स्तोत्र श्रीमद् शंकराचार्य की रचना है, जिसमें उन्होंने शिवशक्ति के अर्धनारीश्वरस्वरूप का वर्णन करके शिवपार्वती को प्रणाम किया है। आठ श्लोकों का यह स्तोत्र इष्टसिद्धि करनेवाला ...

शिव अभिषेक स्तोत्रएक बहुत ही उत्तम स्तोत्र जो महाभारत के द्रोणपर्व में अर्जुन द्वारा रचित है | इसी स्तोत्र के माध्यम से अर्जुन ने शिव को प्रसन्न किया था और युद्ध में विजय प्राप्त किया | इस...

‘शिव महिम्न: स्तोत्र' में प्रश्न है, ‘आप कैसे दिखते हैं शिव? हम आपका स्वरूप नहीं जानते। स्वयं शिव इस प्रश्न का उत्तर इस तरह देते हैं, ‘मैंने आपको दृष्टि दी है, आप जिस तरह, जिस ...

नमः शिवाभ्यां नवयौवनाभ्यांपरस्पराश्लिष्टवपुर्धराभ्याम् ।नगेन्द्रकन्यावृषकेतनाभ्यांनमो नमः शङ्करपार्वतीभ्याम् ॥ 1 ॥नमः शिवाभ्यां सरसोत्सवाभ्यांनमस्कृताभीष्टवरप्रदाभ्याम् ।नारायणेनार्चितपादुकाभ्यांनमो न...

ॐ हिरण्यवर्णां हरिणीं सुवर्णरजतस्रजाम्।चन्द्रां हिरण्मयीं लक्ष्मीं जातवेदो म आ वह।।१।।अर्थ➠ हे जातवेदा (सर्वज्ञ) अग्निदेव! आप सुवर्ण के समान रंगवाली, किंचित् हरितवर्णविशिष्टा, सोने और चाँदी के हार पहन...

शीतला सप्तमी (बसौड़ा पर्व) की पौराणिक कथा इस दिन शीतला माता का पूजन तथा कथा का वाचन किया जाता है। लोक किंवदंतियों के अनुसार बसौड़ा की पूजा माता शीतला को प्रसन्न करने के लिए की जाती है। इस कथा के अनु...

ब्रह्ममुरारिसुरार्चितलिङ्गं निर्मलभासितशोभितलिङ्गम्।जन्मजदुःखविनाशकलिङ्गं तत् प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम्॥१॥देवमुनिप्रवरार्चितलिङ्गं कामदहं करुणाकरलिङ्गम्।रावणदर्पविनाशनलिङ्गं तत् प्रणमामि सदाश...